Auspicious Inauspicious Omens शुभाशुभ शकुन विचार Concepts and Extracts in Hinduism: by Santosh Kumar Bhardwaj
Spotting of white cloths, clear water, tree laden with fruits, clear sky, grain crop in the fields, black grain is considered to be in auspicious. Cotton, Dung mixed with straw, money, embers-fire, home, krayal, shaved headed naked sadhu having massaged oil, iron, leather, mud, hair, mad person, impotent, too are inauspicious.
श्र्वेत वस्त्र, स्वच्छ जल, फल से भरा हुआ वृक्ष, निर्मल आकाश, खेत में लगे हुए अन्न और काला धान्य-इनका यात्रा के समय दिखाई देना अशुभ है। रुई, त्रण मिश्रित सूखा गोबर (कंडा ), धन, अंगार, गृह, करायल, मूँड़ मुड़ाकर तेल लगाया हुआ नग्न साधु, लोहा, कीचड़, चमड़ा, बाल, पागल मनुष्य, हिजड़ा, चांडाल, श्र्वपच, बन्धव की रक्षा करने वाला मनुष्य, गर्भिणी स्त्री, राख, खोपड़ी, हड्डी और फूटा हुआ बर्तन-युद्ध यात्रा के समय इनका दिखाई देना अशुभ है। बाजों का वह शब्द जिससे फूटे हुए झांझ की भयंकर ध्वनि सुनाई पड़ती हो, अच्छा नहीं माना गया है। पीछे से : "चले आओ"सुनाई दे तो अशुभ है। "जाओ" शब्द आगे से सुनाई दे तो निन्दित है। कहाँ जाते हो ? ठहरो, न जाओ ; वहां जाने से तुम्हें क्या लाभ है ?-ऐसे शब्द अनिष्ट के सूचक हैं। यदि ध्वजा के ऊपर चील आदि माँसाहारी पक्षी बैठ जाये, घोड़े, हाथी, आदि लड़खड़ा कर गिर पड़ें, हथियार टूट जायें, हार आदि के द्वारा मस्तक पर चोट लगे तथा छत्र और वस्त्र आदि को, कोई गिरा दे तो, ये सब अपशकुन मृत्यु का कारण बनते हैं। भगवान विष्णु की पूजा और स्तुति करने अमंगल का नाश होता है। यदि दूसरी बार इन अपशकुनों का दर्शन हो तो घर लौट आना चाहिये।
यात्रा के समय श्वेत पुष्पों का दर्शन श्रेष्ठ है। भरे हुए घड़े का दिखाई देना तो बहुत ही श्रेष्ठ है। मांस, मछली, दूर का कोलाहल, अकेला वृध पुरुष, पशुओं में गौ, बकरे, घोड़े तथा हाथी, देव प्रतिमा, प्रज्वलित अग्नि, दूर्वा, ताजा गोबर, वेश्या, सोना, चाँदी, रत्न, बच, सरसों आदि औषधियाँ; मूँग, आयुधों में तलवार, छाता, पीढ़ा, राजचिन्ह, जिसके पास कोई रोता न हो ऐसा शव, फल, दही, दूध, अक्षत, दर्पण, मधु, शंख, ईख, शुभ सूचक वचन, भक्त पुरुषों का गाना-बजाना, मेघ की गंभीर आवाज-गर्जना, बिजली की चमक तथा मन का संतोष-ये सब सुभ सूचक शकुन हैं। सामने से : "चले आओ" सुनाई दे तो शुभ है।"जाओ" शब्द पीछे से सुनाई दे तो उत्तम है। एक और सब प्रकार के शकुन और दूसरी ओर मन की प्रसन्नता-ये दोनों बराबर हैं।
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