आज भारत में करोड़ों लोग आंखो की बीमारियों से पीड़ित है लोगों को अपने भारतीय ज्ञान विज्ञान के बारे मे अंग्रेज़ो ने सब कुछ भुलवा दिया इसलिए भारतवासी आज इस कगार पर आ पहुंचे है की स्वयं जिस देश मे अमृत निवास करता है उस देश के नागरिक गौ मांस और सूअर मांस से बनी हुई दवाइयां खा रहे है और उनके साइड इफैक्ट से उनकी आँखें दिल, दिमाग, आंत, गुर्दे न जाने क्या क्या सड़ रहा है तो आइये वापस अपने परम ज्ञान की और लौटिए और इसे जानिए|
गौ माँ का गौरव
शरद पूर्णिमा के दिन अमृत वर्षा होती है, आम काले अंग्रेज़ इस बात को समझने में 100000000000000000000 साल लगा देंगे क्योंकि इतने समय बाद अमेरिका पता लगा पाएगा की अमृत क्या होता है आप इसलिए उनकी बातों में मत आइएगा|
..... तो अब मैं अपनी बात आरंभ करता हूँ चंद्रमा के घटने और बढ़ने की वजह से मानव और पृथ्वी दोनों के ही ऊपर असर पड़ता है, भारत में या दुनिया भर में किसी महिला के गर्भ में स्त्री होगी या पुरुष इसका निर्धारण भी चन्द्र विज्ञान से होता है खैर ये बहुत बड़ा विज्ञान है अगर मैं इसके ऊपर ही बात करने लगा तो काफी समय चला जाएगा।
चंद्रमा से शरद पूर्णिमा के दिन ऐसी किरणें निकलती है जो मानव शरीर के लिए अमृतमयी
है और स्वास्थयवर्धक है|
इसलिए ही इस रात्रि में गाय के दूध से बनी खीर चंद्रमा की रोशनी में रखकर फिर उसका सेवन किया जाता है शरद पूर्णिमा के दिन| अब में बात करता हूँ गौ माँ और शरद पूर्णिमा की तो आप ध्यान दीजिये की भारत की जो गाय है यानिकी देशी नस्ल की गौ माँ उनके शरीर में स्थित शिव पिंडी (कूबड़) ऐसा राडार है जो ब्रम्हांड के ग्रहों से प्राप्त ऊर्जा एवं तरंगों को विशेष नक्षत्रों में अपने शरीर में ग्रहण करके क्रिया करने अपने शरीर में विशेष प्रकार के औषधीय गुण वाले दूध, मूत्र और गोबर का निर्माण करते है|
तो इसी प्रक्रिया में आती है शरद पूर्णिमा इस दिन गौ माँ चन्द्र से क्रिया करती है और अपने मूत्र मे ऐसा औषधीय गुण लाती है की दुनिया का कोई सा भी आँखों का रोग हो गौ माँ के इस रात्रि के मूत्र को जो शरद पूर्णिमा की रात्री को लिया गया है उसे आंखो मे डाला गया तो सम्पूर्ण नेत्ररोग ठीक जाएंगे|
तो आप सभी या आपके परिचित जो किसी भी नेत्ररोग से पीड़ित है वो इस प्रयोग को अपनाइए|
गौ माँ का गौरव
शरद पूर्णिमा के दिन अमृत वर्षा होती है, आम काले अंग्रेज़ इस बात को समझने में 100000000000000000000 साल लगा देंगे क्योंकि इतने समय बाद अमेरिका पता लगा पाएगा की अमृत क्या होता है आप इसलिए उनकी बातों में मत आइएगा|
..... तो अब मैं अपनी बात आरंभ करता हूँ चंद्रमा के घटने और बढ़ने की वजह से मानव और पृथ्वी दोनों के ही ऊपर असर पड़ता है, भारत में या दुनिया भर में किसी महिला के गर्भ में स्त्री होगी या पुरुष इसका निर्धारण भी चन्द्र विज्ञान से होता है खैर ये बहुत बड़ा विज्ञान है अगर मैं इसके ऊपर ही बात करने लगा तो काफी समय चला जाएगा।
चंद्रमा से शरद पूर्णिमा के दिन ऐसी किरणें निकलती है जो मानव शरीर के लिए अमृतमयी
है और स्वास्थयवर्धक है|
इसलिए ही इस रात्रि में गाय के दूध से बनी खीर चंद्रमा की रोशनी में रखकर फिर उसका सेवन किया जाता है शरद पूर्णिमा के दिन| अब में बात करता हूँ गौ माँ और शरद पूर्णिमा की तो आप ध्यान दीजिये की भारत की जो गाय है यानिकी देशी नस्ल की गौ माँ उनके शरीर में स्थित शिव पिंडी (कूबड़) ऐसा राडार है जो ब्रम्हांड के ग्रहों से प्राप्त ऊर्जा एवं तरंगों को विशेष नक्षत्रों में अपने शरीर में ग्रहण करके क्रिया करने अपने शरीर में विशेष प्रकार के औषधीय गुण वाले दूध, मूत्र और गोबर का निर्माण करते है|
तो इसी प्रक्रिया में आती है शरद पूर्णिमा इस दिन गौ माँ चन्द्र से क्रिया करती है और अपने मूत्र मे ऐसा औषधीय गुण लाती है की दुनिया का कोई सा भी आँखों का रोग हो गौ माँ के इस रात्रि के मूत्र को जो शरद पूर्णिमा की रात्री को लिया गया है उसे आंखो मे डाला गया तो सम्पूर्ण नेत्ररोग ठीक जाएंगे|
तो आप सभी या आपके परिचित जो किसी भी नेत्ररोग से पीड़ित है वो इस प्रयोग को अपनाइए|

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